
सुनो,
अगर तुम्हारी पहचान तुम्हारे दिमाग से नहीं, तुम्हारी जाति से तय हो रही है, तो समझो कि समाज ने तुम्हें इंसान नहीं, फाइल बना दिया है।
“जाति मेरे जूते की नाप है, दिमाग की नहीं” ये मैंने कोई नारा नहीं दिया। यह मानसिक आज़ादी का ऐलान है। जूते की नाप छोटी हो सकती है, बड़ी हो सकती है। बदल भी सकती है। लेकिन दिमाग? वह तो सीमाओं को तोड़ने के लिए बना है, उनमें कैद होने के लिए नहीं।
युवाओं से सीधी बात
तुम्हारी generation के पास इंटरनेट है, AI है, startup culture है, global exposure है। लेकिन अगर तुम आज भी दोस्त चुनते वक्त surname देखते हो, तो technology upgrade है, mindset नहीं। तुम IIT, UPSC, Startup, Coding, Content Creation, Sports हर जगह competition की बात करते हो। फिर खुद को caste label से क्यों limit करते हो?
तुम्हारी ambition की कोई जाति नहीं। तुम्हारी मेहनत का कोई गोत्र नहीं। तुम्हारे सपनों पर कोई उपनाम नहीं लिखा।
विद्रोह क्यों?
क्योंकि सदियों से समाज ने हमें categories में बांटा। Category से सुविधा मिली, पर category से दीवार भी बनी। अब सवाल यह है कि
क्या हम उस दीवार को पहचान के नाम पर स्थायी बना देंगे? या उसे अवसर में बदल देंगे? “जाति मेरे जूते की नाप है” मतलब पहचान हो सकती है, पर पहचान मेरी सोच का कंट्रोलर नहीं होगी।
अब समझों, असली आंदोलन क्या है?
असली आंदोलन सड़कों पर नहीं, सोच में होता है। जब तुम यह तय कर लेते हो कि तुम दोस्ती talent से करोगे, शादी समझ से करोगे, सम्मान इंसानियत से दोगे, तब आंदोलन शुरू हो चुका होता है।
युवाओं के लिए सलाह
अपनी पहचान से भागो मत, लेकिन उसे ceiling मत बनाओ। अपने circle में diversity को normal बनाओ। skill को surname से ऊपर रखो। merit को जाति से confuse मत करो। तुम्हारी पीढ़ी अगर चाह ले, तो caste debate को hate debate बनने से रोक सकती है।

समाज बदलने का इंतजार मत करो। समाज तुम्हारे decisions से बदलेगा। जब अगली बार कोई पूछे “आपकी जाति क्या है?” तो मुस्कुराकर कहो “जूते की नाप बता दूं या दिमाग की उड़ान?” यही असली क्रांति है। यही असली आत्मसम्मान है।
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“जाति मेरे जूते की नाप है, दिमाग की नहीं” यह लाइन सिर्फ catchy quote नहीं है, यह mindset revolution का draft है।
जूते की नाप बदल सकती है। दिमाग की उड़ान update मांगती है। समस्या तब शुरू होती है जब society आपको size chart में फिट करना चाहती है। सोचिए अगर दिमाग की भी caste होती तो exam form में एक नया column होता “Brain Category: Reserved / Unreserved / Flexible”
हकीकत यह है कि intelligence का कोई community card नहीं होता। जो पढ़ता है, जो मेहनत करता है, वही आगे बढ़ता है।
“जाति मेरे जूते की नाप है” यह वाक्य rebellion कम, responsibility ज्यादा है। यह कहता है कि नई पीढ़ी caste consciousness से आगे बढ़कर competence culture बनाए। समाज बदलने का सबसे तेज तरीका है अपनी सोच का version update करना।
